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Testimnials:


The readers views are given below, what are their expectations from us, their experience with us and lot of moments they enjoyed with our magazine. Also some complaints are there, we are always improving ourselves. If our readers facing any problem, We are always ready to resolve it. People are expressing the real picture of the problems and situations they facing. We are focussing on the real news, through the depth of truth. Our readers when read such a news.

Our readers are so excited to read the the latest issue, as in each issue there is something special for each age group, for children, youngsters

समान रूप से देखने की जरूरत
 महोदय,
      आपके पत्रिका के पिछले अंक में छपे आवरण कथा को पढ़कर यही कह सकता हूं कि आज के नेता यह भुल जाते हैं कि किसी राज्य का मुख्यमंत्री होने का मतलब सिर्फ उस राज्स का मुख्यमंत्री होना ही नही होता। बल्कि देष के बारे में सोचना भी उनका कर्तव्य है। सच पूछें तो कोई मुख्यमंत्री ऐसा न कर सिर्फ अपनी जिम्मेदारियों से भग रहे दिखतें हैं। समस्या तो यह है कि उन्हें इतनी सी छोटी सी बात समझ में नही आती की अपनी इस नीति से वह खुद अपनी छवि बिगाड़ लेते हैं।                         
                                              सोहन सिंह, बनारस, उप्र
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पत्रिका का भविष्य उज्ज्वल
सम्पादक जी,
         श्रीमान  आपकी पत्रिका मदर इंडिया का पिछला अंक समय से मिला। इस बार आपकी पत्रिका बहुत ही अच्छी लगी, इसके लिए पुरी टीम को हार्दिक धन्यवाद। पत्रिका में वर्ष दर वर्ष निखार आ रहा है। जो इसके उज्ज्वल भविष्य की ओर इंगित करता है।
     वैसे भी किसी पत्रिका का एक दषक से अनवरत चलते रहना दर्षाता है कि पत्रिका में लिखे आलेखों में निष्चित ही जान है तभी तो पाठक इसे वर्सो से पढ़ते हैं।                                                                                       रामकुमार झा, पटना
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खतरे में गंगा मैया
महोदय जी आपकी पत्रिका का बेसब्री से इंतजार कर रहा था। इस बार आपकी पत्रिका का जून अंक बहुत ही आकर्सक और ज्ञानप्रद लगा। पलटतें ही गंगा का अस्तित्व पढ़ कर एहसास हुआ कि भ्रष्टाचारियों ने गंगा रूपी मां को भी नहीं बख्षा। ढ़ाई दशक  और लगभग दो हजार करोड़ रूप्ये खर्च होने के बाद भी अगर गंगा मरती ही जा रही है तो इसमें राजनीतिक इच्छा शक्ति  की कमी और भ्रष्टाचारियों का अहम योगदान है।
                                                अजय श्रीवास्तव
                                              बनारस, उ.प्र.

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फिल्म के पेज को बढ़ाया जाए
   श्रीमान जी, आपकी पत्रिका एक स्टाल पर बिकती हुई देखी, इसका कवर पेज बहुत ही अच्छा लगा इसलिए मैंने इस पत्रिका को खरीद लिया। इस पत्रिका में राजनीति, अपराध, राशिफल के साथ-साथ फिल्म के बारे में पढ़ने को मिला। मैं सम्पादक जी से अनुरोध करना चाहती हूं कि कृपया फिल्मों के बारे में और पेज बढ़ाया जाए ताकि हमलोगों को फिल्मों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी मिल सके।
                                              कुमारी रानी
                                             गोरखपुर, उत्तर प्रदेश 
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गागर में सागर है मदर इंडिया पत्रिका 
मदर इंडिया पत्रिका इस बार समय से मिली। मिलते ही मैंने इसे पढ़ना ष्षुरू कर दिया। आपकी पत्रिका को मैं बड़े ही चाव से पढ़ता हूं क्योंकि आपकी पत्रिका में देश-विदेश  के ज्वलंत मुद्दो को उठाया जाता है। इतना ही नहीं इस पर समीक्षात्मक विवेचन किया जाता है। जो भी कहा जाता है स्पष्ट बेबाक होकर कहा जाता है। चाहें सत्ता पक्ष से सम्बंधित मुद्दा हो या विपक्ष या आम नागरिक, खबरों के प्रस्तुतिकरण में सबके साथ न्याय किया जाता है। सच्चे अर्थो में मदर इंडिया पत्रिका पत्रकारिता की भूमिका निभा रही है।
                                                     मोहित कुमार
                                                    उत्तम नगर, दिल्ली
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वादा है वादों का क्या?

महोदय, आपकी पत्रिका इस बार मुझे बड़ी कठिनाई से प्राप्त हुई। कारण हमारा घर शहर  से दूर सुदूर देहात गांव में है। जहां बिजली रानी भी महीनों गायब रहती हैं। जी हां, अब आप समझ गये होंगे मैं बात कर रहा हूं बिहार राज्य के वैशाली  जिला का जहां बिजली, शिक्षा  और चिकित्सा अभी भी सही ढंग से नही पहुंच पाया है। ‘कोई भी बिहारी रोटी के लिए बाहर नहीं जाएगा- नीतीष’ पढ़कर बहुत अटपटा लगा क्योंकि बाहर नही जाएगा तो यहां भूखे मरेगा, मैं माननीय मुख्यमंत्री जी से पुछना चाहता हुं कि आपके चुनाव के समय में हम लोगों से बड़े-बड़े वायदा किया था कि नया बिहार बनाएंगे, कोई भी किसान आत्महत्या नहीं करेगा, कोई भी गरीब भुखा नहीं सोएगा, लेकिन आपके राज्य में गरीब भुखा सोता है और भ्रष्टाचार, अपराध की बढ़ोतरी में कोई कमी नहीं हुई। वादा है वादों का क्या? सही साबित हो रहा है।
                                           बिरेन्द्र राय
                                      वैशाली , बिहार

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भारत विश्व  गुरू अवश्य  बनेगा
श्रीमान सम्पादक महोदय जी,
   नमस्कार! आपकी पत्रिका समय से मिली। मदर इंडिया पत्रिका में खासतौर से आपके द्वारा लिखा गया सम्पादकीय बहुत ही चाव से पढ़ती हूं। आपने विवेकानन्द जी का उल्लेख करते हुए लिखा है कि उनके बताये गये रास्तों पर हम चलें तो हमारे देष का उदय होने से कोई नहीं रोक सकता। क्योंकि हमारे देष की संस्कृति सभ्यता की जड़ आज भी उसी मजबूती के साथ विद्यमान है।
                                           रीता शर्मा 
                                          गुवाहाटी, असम
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